न्यायलय द्वारा दिल्ली के एनसीआर में १ नवम्बर तक पटाखों की बिक्री पर लगाए गए बैन को ले कर पहले ही सोशल मीडिया पर आग लगी हुई है. उसपर अब सागरिका घोस और शशि थरूर ने अपने ब्रांड के सेकुलरिज्म का अलग तडका लगा दिया है. अब लोग पिल पड़े हैं कि इन दोनों को सत्य का साक्षात्कार करा कर ही चैन लेंगे.

Sagarika Ghose (@sagarikaghose) ने बिना किसी धर्म या त्यौहार का नाम लिए केवल पटाखों और बकरों की हत्या पर टिप्पणी की थी

“बकरों की हत्या पटाखे फोड़ने के समकक्ष नहीं है क्योंकि बकरों की मृत्यु का बाकी के साँस ले रहे नागरिकों पर सीधा-सीधा कोई प्रभाव नहीं होता”

सागरिका घोस की भांति शशि थरूर ने धर्म-त्योहारों के नाम लेने से बचने का प्रयास भी ना किया और अपनी बात सीधे सीधे कुछ इस प्रकार रखी

“बकर ईद की क़ुरबानी केवल बकरों के लिए पीड़ादायक होती है; मुहर्रम पर शोक मनाने वाले स्वयं को कोड़े मारते हैं, परन्तु दिवाली के पटाखे दिवाली मनाने वाले और अन्य लोगों को समान रूप से प्रभावित करते हैं.”

बस इतना ही कहना था कि लोगों ने सागरिका घोस और थरूर की क्लास ले डाली!

ट्विटर के ही एक वेरिफाइड अकाउंट, Sankrant Sanuसानू (@sankrant) थरूर से उलझ पड़े. पहले तो इन्होने केवल ३ शब्दों का एक प्रश्न दागा –

“अज़ान के विषय में क्या कहेंगे?”

तत्पश्चात दूसरे ट्वीट में ‘हफिंग्टन पोस्ट’ नामक वेबसाईट के एक लेख का हवाला देते हुए बोले –

“जी हाँ, ये दूसरों को प्रभावित करता है – मांसाहार बंद कर दिया जाए तो विश्व से भूख का अंत किया जा सकता है. क़ुरबानी का नंगा नाच फुलझड़ी से कहीं बुरा है.”

तीसरे और इस विषय पर अंतिम ट्वीट में संक्रांत सानू कहते हैं –

“शशि थरूर इस बात के उदाहरण हैं कि इस्लाम का नाम आते ही उदारवादी-लिबरल जनों का मस्तिष्क कैसे काम करना बंद कर डेता है. हिजाब “प्रगतिवादी” है, कुर्बानी “उनका क्रियाकलाप” है.”

एक ट्विटर THAKUR यूजर साहब (@AmanTha70479765) तो सागरिका पर बिफर ही पड़े. वैसे बात में दम तो है बन्दे की!

सागरिका घोस को ही उत्तर देते हुए एक अन्य ट्विटर यूजर Sameer Bhalerao (@TrustSamb) ने ये कार्टून ट्वीट किया –

वहीँ थरूर को उत्तर देते हुए Shadaksharayya hirem (@shadaksharayyah) ने ये कटाक्षपूर्ण मेमे ट्वीट किया, जिसमें छिपा-घबराया सा काला बकरा ये कहता दिख रहा है –

“वो भाग्यवान कमीना मर रहा है, और मुझे यहाँ दिवाली के पटाखों का कोलाहल झेलना पड़ेगा.”

एक महाशय ने थरूर का ध्यान एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर आकर्षित करने का प्रयत्न कुछ यूँ किया –

“नहीं श्रीमान थरूर – बकर-ईद की कुर्बानियाँ बकरों को केवल “पीड़ा” नहीं पहुंचाती, उनके प्राण हर लेती है. पटाखे ऐसा नहीं करते.”

Shaikh Ben Afflecki (@paynchOm) ने थरूर को आड़े हाथों लेते हुए प्रश्न किया कि –

“कभी कार्बन-फुटप्रिंट’ के विषय में सुना है? कैसे मांसाहार साल में एक बार के पटाखों की अपेक्षा पर्यावरण को अधिक हानि पहुंचाते हैं?”

इतने में ही Albus Dumbledore (@dd_hogwarts) ने एक चुभने वाला तर्क भांज डाला –

“इस तर्क से तो इनकी (थरूर की) पत्नी की हत्या भी सही थी क्योंकि उससे पीड़ा केवल उन्हें ही हुई. कैसा घिनौना, हत्या को उचित ठहरानेवाला, इस्लाम का पक्षपोषक है!”

सागरिका घोस के ट्वीट के उत्तर में Dhongi Monk (@DhongiMonk) का ये कहना था –

“बकरों की हत्या का तर्क उनके लिए है जो (दिवाली पर) जानवरों के प्रति दयाभाव का प्रवचन देते हैं और ये बताते हैं कि जानवरों को पटाखों से भय लगता है. बहुत उलझन(कन्फ्यूजन) है?”

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