छायाचित्र स्रोत

आजकल जब-तब सोशल मीडिया पर कोई ना कोई रावण के गुणों का बखान करता अवश्य मिल जाता है। कदाचित ऐसा करने से लोग ‘बुद्धिजीवी’ की पदवी/प्रमाणपत्र पा लेते होंगे। वैसे इन लोगों में सबसे आगे वे होते हैं जिन्हें ‘नारी के सम्मान’ की पताका लहराने का चस्का होता है। कुछ ऐसे ही फ़ेसबुकियाबुद्धिजीवियोंको मैंने सोशल मीडिया पर येज्ञानबघारते पाया कि रावण एक बहुत ही महान भाई थाउसने अपनी बहन शूर्पणखा के सम्मान के लिए सबकुछ दाँव पर लगा दिया। अपने बहन के अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए रावण ने अपने प्राण तक गँवा दिएऐसा महान भाई था रावण! कुछ बुद्धिजीवी कन्याओं ने तो ये कामना भी कि भाई हो तो रावण जैसा! इनके इस ज्ञान को पढ़ कर अपने दोनों हाथों से अपना सर पीट लिया।

जिन्हें पूरी रामायण नहीं पता उन्हें ये बात सत्य ही लगेगी। तभी अर्धसत्य को घातक कहा है बड़ेबूढ़ों ने! तो चलिए, जिन्हें पूरी कथा नहीं पता, उनके ज्ञानचक्षुओं को थोड़ा सा खोला जाए।

तो हुआ ये, कि शूर्पणखा, जो कि ऋषि विशर्वा दूसरी पत्नी कैकसी की सबसे छोटी संतान थीं, ने कालकेय दानवों के राजकुमार ‘विद्युतजिह्वा’ से प्रेम-विवाह किया। पहले तो रावण इस विवाह के विरुद्ध था, परंतु बाद में बहन के प्रेम के कारण मान जाता है। वैसे तो केवल इसी बात पर जो ‘बुद्धिजीवी’ वर्ग रावण को ‘हीरो’ सिद्ध करने पर तुला होता है, उसे पुनः खलनायक का पट्टा पहना देता, परंतु कहानी अभी भी शेष है। अब दो अलग-अलग कथाएं हैं – एक के अनुसार रावण विद्युतजिह्वा को किसी युद्ध में भेज देता है, वहाँ उसकी मृत्यु हो जाती है। दूसरी के अनुसार, विद्युतजिह्वा रावण को मार कर उसका राज्य हड़पना चाहता है। इस कारणवश वह रावण पर आक्रमण करता है और आपस के युद्ध में मारा जाता है।

 

मने, दोनों ही कथाओं के अनुसार बहन के सुहाग उजड़ने का कारण रावण ही बनता है। इसपर शूर्पणखा क्रुद्ध हो रावण का सत्यानाश कराने की सौगंध ले लेती है। षडयंत्रमतलब, गयी कहानीसासबहूटाइप सीरियल की पटरी पर!

अब कहानी तनिक ‘फ़ास्ट-फॉरवर्ड’ हो कर राम जी के वनवास पर पहुँचती है, जहाँ शूर्पणखा उन्हें देखती है। शूर्पणखा समझ जाती है कि यही वो अवतार हैं जो रावण एंड पार्टी की बैंड बजा सकते हैं। इसलिए पहले तो उन्हें अपना रूप बदल कर मोहित करने के प्रयास करती है, और ये चाल ना चलने पर ‘फ्रस्टेटिया’ कर सीता माता पर हमला कर, लक्ष्मण जी द्वारा अपनी नाक कटवा लेती है। मने, किसी ना किसी प्रकार से राम जी से पंगा ले ही लेती हैं। तत्पश्चात शूर्पणखा ‘आंटी’ रावण को सीता जी की सुंदरता का बखान सुनाती हैं – ये बखान किसी पोर्न फिल्म से कम ना समझिएगा। रावण इतना ठरकी था कि इस सीता को पाने के लिए निकल पड़ा और राम जी से भिड़ गया।

रावण पहले भी असंख्य स्त्रियों का बलात्कार कर चुका था और इसी कारणवश श्रापित था कि यदि वह किसी स्त्री को उसकी इच्छा के विरुद्ध हाथ भी लगाएगा तो उसके सर के सहस्त्रों टुकड़े हो जाएंगे *बूम*! मतलब, जब तक नारी “ज़रा-ज़रा टच-मी टच-मी टच-मी” ना गए, रावण जी को अपनी ठरक पर नियंत्रण रखना पड़े!

अब कथाएं और भी हैं। पर हर कथा में रावण किसी भी प्रकार अपनी बहन के प्रेम के कारण राम जी से पंगा नहीं लेता। कारण कुछ और ही होते हैं। इसलिए अभी केवल हमारी बताई कथा पर ध्यान दें। और हमारी कथा के अनुसार रावण अपने ठरकपन के कारण कुचर दिया गया… बहन के प्रेम के कारण नहीं। उल्टा वह बहन के सुहाग उजड़ने का कारण बना था!

तो देवियों और सज्जनों, पहले रामायण का पाठ करें, उसके बाद उसपर टिप्पणी करें। टीवी पर सीरियल में माल-मसाला लगा कर जो छिछोर-छाप रामायण दिखाया जाता है, उसे केवल मनोरंजन समझें। असली रामायण किसी ज्ञानी पंडित से सुने-समझें… पोंगा-पंडित नहीं, ज्ञानी पंडित!

देवियों से विशेष प्रार्थना – किसी ‘बुद्धिजीवी’ के बहकावे में आ कर रावण जैसे भाई के लिए भगवान् से प्रार्थना कर बैठी हों तो अब दूसरी कन्याओं के लाज को बचाने का उत्तरदायित्व भी आप पर ही है!

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